छोटी कटेरी (कंटकारी) के 21 औषधीय लाभ | खांसी,कफ, दमा, ज्वर, दांत दर्द और मूत्र रोग की आयुर्वेदिक दवा | Kantakari

Sachinta maharaj

छोटी कटेरी (कंटकारी) के 21 अद्भुत औषधीय लाभ | खांसी, दमा, ज्वर और मूत्र रोगों की आयुर्वेदिक औषधि

छोटी कटेरी (कंटकारी) परिचय

छोटी कटेरी, जिसे आयुर्वेद में कंटकारी (Kantakari) कहा जाता है, एक प्रसिद्ध औषधीय वनस्पति है। यह भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से पाई जाती है। आयुर्वेद में इसे दशमूल समूह की महत्वपूर्ण औषधियों में गिना जाता है। इसका उपयोग विशेष रूप से खांसी, दमा, कफ, ज्वर, मूत्र विकार और वात रोगों में किया जाता है।


विभिन्न भाषाओं में नाम

  • हिन्दी: कटेरी, भटकटैया, रींगणी, लघुकटाई
  • संस्कृत: कंटकारी, निदग्धिका, क्षुधा, व्याघ्रि
  • मराठी: रींगणी, भुई रोहिणी
  • गुजराती: भोयरींगणी
  • बंगाली: कंटकारी
  • तेलगू: रेवटी मुलंगा
  • उर्दू: कटीला
  • अरबी: वदन जाँकरे

प्राप्तिस्थान

छोटी कटेरी पूरे भारत में खेतों, बंजर भूमि, सड़क किनारों तथा खुले क्षेत्रों में आसानी से उगती है।

छोटी कटेरी की पहचान

  • पौधा जमीन पर फैलकर बढ़ता है।
  • कांटे पीले, मुलायम और चमकीले होते हैं।
  • शाखाएं टेढ़ी-मेढ़ी होती हैं।
  • पत्तियां लंबी, गोल और किनारों पर कांटेदार होती हैं।
  • फूल बैंगनी रंग के होते हैं जिनमें पीले रंग की केसर होती है।
  • कच्चे फल सफेद और पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं।
  • बीज मुलायम होते हैं।

आयुर्वेदिक गुण एवं धर्म

आयुर्वेद के अनुसार छोटी कटेरी:

  • कड़वी एवं चरपरी
  • अग्निदीपक एवं पाचक
  • हल्की एवं रूक्ष
  • उष्ण वीर्ययुक्त
  • कफ एवं वात नाशक
  • श्वास, खांसी, ज्वर और पीनस में लाभकारी

इसके फल हृदय के लिए हितकारी तथा कृमि, प्रमेह और श्वास रोगों में उपयोगी माने गए हैं।

छोटी कटेरी के प्रमुख औषधीय लाभ

1. खांसी में लाभकारी

कटेरी के फूलों की केसर का चूर्ण शहद के साथ देने से बच्चों की विभिन्न प्रकार की खांसी में लाभ मिलता है।

2. दमा (अस्थमा) में उपयोगी

इसके फलों का काढ़ा हींग और सेंधा नमक के साथ सेवन करने से दमा के लक्षणों में राहत मिलती है।

3. कफ निकालने में सहायक

कटेरी का काढ़ा छाती में जमा कफ को बाहर निकालने में मदद करता है।

4. ज्वर (बुखार) में लाभ

गिलोय और पित्तपापड़ा के साथ इसका काढ़ा मौसमी बुखार में उपयोगी माना जाता है।

5. जुकाम में राहत

मौसम परिवर्तन से होने वाले जुकाम में इसका काढ़ा लाभदायक माना गया है।

6. मूत्र रुकावट दूर करे

कटेरी के स्वरस को मट्ठे में मिलाकर देने से पेशाब की रुकावट में लाभ बताया गया है।

7. सुजाक में उपयोग

रातभर भिगोई हुई कटेरी का पानी मिश्री के साथ सेवन करने से सुजाक में लाभ बताया गया है।

8. जलोदर में सहायक

यह प्राकृतिक मूत्रल (Diuretic) के रूप में कार्य कर शरीर से अतिरिक्त जल निकालने में मदद करती है।

9. यकृत (लिवर) विकारों में उपयोगी

आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे लिवर वृद्धि और संबंधित समस्याओं में लाभकारी बताया गया है।

10. तिल्ली वृद्धि में लाभ

तिल्ली के बढ़ने की स्थिति में इसका पारंपरिक उपयोग किया जाता रहा है।

11. दांत दर्द में राहत

इसकी जड़, छाल, पत्ते और फल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांत दर्द में आराम मिलता है।

12. मसूड़ों के रोगों में उपयोगी

इसके धुएं का पारंपरिक उपयोग दांत और मसूड़ों के दर्द में किया जाता था।

13. पेट का अफारा दूर करे

इसकी डंडी, फूल और फल पेट की गैस एवं अफारे को कम करने में सहायक माने जाते हैं।

14. मंदाग्नि में लाभकारी

कटेरी आधारित घृत का सेवन पाचन शक्ति बढ़ाने में उपयोगी बताया गया है।

15. आमवात में उपयोग

इसके पत्तों का रस काली मिर्च के साथ आमवात में दिया जाता है।

16. नकसीर रोकने में सहायक

पत्तों या जड़ के रस को नाक में डालने से नकसीर में लाभ बताया गया है।

17. सिरदर्द में राहत

फलों के रस का ललाट पर लेप करने से सिरदर्द में आराम मिल सकता है।

18. आंखों के दर्द में उपयोग

पत्तों की लुग्दी आंखों पर बांधने का पारंपरिक उल्लेख मिलता है।

19. मूत्राशय की पथरी में सहायक

आयुर्वेदिक मतानुसार यह मूत्राशय की पथरी में उपयोगी हो सकती है।

20. हृदय के लिए लाभकारी

इसके फलों को हृदय हितकारी बताया गया है।

21. वात रोगों में उपयोगी

कटेरी और गिलोय से बने घृत का सेवन वातजन्य खांसी और वात विकारों में उपयोग किया जाता है।

यूनानी चिकित्सा में महत्व

यूनानी चिकित्सा पद्धति में छोटी कटेरी को गर्म और खुश्क माना गया है। इसका उपयोग:

  • खांसी
  • दमा
  • कफ रोग
  • सुजाक
  • कब्ज
  • मूत्राशय की पथरी

जैसी समस्याओं में किया जाता है।

सावधानियां

  • किसी भी रोग के उपचार हेतु चिकित्सकीय सलाह के बिना इसका सेवन न करें।
  • गर्भवती महिलाओं और बच्चों में प्रयोग से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लें।
  • आंख, नाक या अन्य संवेदनशील अंगों में पारंपरिक प्रयोग आधुनिक चिकित्सकीय सलाह के बिना न करें।

निष्कर्ष

छोटी कटेरी (कंटकारी) आयुर्वेद की अत्यंत महत्वपूर्ण औषधि है। यह विशेष रूप से खांसी, दमा, कफ, ज्वर, मूत्र रोग, दांत दर्द और वात विकारों में उपयोगी मानी जाती है। इसके अनेक पारंपरिक उपयोग वर्णित हैं, लेकिन किसी भी गंभीर रोग में इसका प्रयोग योग्य आयुर्वेदाचार्य की देखरेख में ही करना चाहिए।

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