उड़द के आयुर्वेदिक लाभ शरीर को शक्ति प्रदान, स्तनपान, हड्डियों एवं जोड़ों, लकवा, गठिया, हिचकी, सूजन, मुख विकारों | Black Gram Benefits

Sachinta maharaj

उड़द (Black Gram) के आयुर्वेदिक लाभ, गुण और घरेलू उपयोग

उड़द (Black Gram) भारतीय रसोई का एक महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है, जिसका उपयोग दाल, पापड़, बड़ा, डोसा और अनेक व्यंजनों में किया जाता है। आयुर्वेद, यूनानी तथा पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में उड़द को बलवर्धक, पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक माना गया है।


उड़द का परिचय

हिन्दी: उड़द, उरिद, टिकिरी
संस्कृत: मष, बीजरत्न, धान्यवीर, कुरुविन्द, बलाढ्य आदि
गुजराती: अड़द
बंगाली: माशाकलाई
मराठी: वाइडिड
तेलगू: मिनुमुल
कन्नड़: उद्दू
तमिल: पटचैपरी

उड़द का उपयोग पूरे भारत में व्यापक रूप से किया जाता है और यह प्रोटीन, खनिज तथा ऊर्जा का उत्कृष्ट स्रोत है।

आयुर्वेद के अनुसार उड़द के गुण

आयुर्वेद में उड़द को निम्न गुणों वाला बताया गया है:

  • बल एवं शक्ति बढ़ाने वाला
  • वीर्यवर्धक एवं पुष्टिकारक
  • स्निग्ध एवं तृप्तिकारक
  • मांसपेशियों को मजबूत करने वाला
  • दुग्धवर्धक (स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए लाभकारी)
  • मूत्रल एवं मलभेदक
  • थकान दूर करने वाला
  • हृदय के लिए हितकारी

हालांकि इसका अधिक सेवन कफ, गैस तथा रक्त विकारों को बढ़ा सकता है, इसलिए संतुलित मात्रा में सेवन करना चाहिए।

यूनानी चिकित्सा में उड़द का महत्व

यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार उड़द:

  • कामशक्ति बढ़ाने वाला
  • स्नायु तंत्र को शक्ति प्रदान करने वाला
  • रक्तस्राव रोकने में सहायक
  • लकवा एवं आमवात में लाभकारी
  • यकृत संबंधी विकारों में उपयोगी
  • दुग्धवर्धक एवं पौष्टिक

उड़द का पाचन अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है। इसलिए इसके साथ हींग, अदरक और काली मिर्च का उपयोग लाभकारी माना गया है।

उड़द के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

1. शरीर को शक्ति प्रदान करता है

उड़द में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होता है, जो शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और ऊर्जा प्रदान करता है।

2. स्नायु तंत्र को मजबूत बनाता है

पारंपरिक चिकित्सा में उड़द का उपयोग स्नायु दुर्बलता, लकवा और वात रोगों में किया जाता रहा है।

3. स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए लाभकारी

उड़द की साधारण दाल दुग्धवर्धक मानी जाती है और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को लाभ पहुंचाती है।

4. हड्डियों एवं जोड़ों के लिए उपयोगी

उड़द का सेवन हड्डियों और जोड़ों को मजबूती प्रदान करने में सहायक माना जाता है।

5. थकान और कमजोरी दूर करता है

यह शरीर को पोषण देकर कमजोरी और थकान को कम करने में मदद करता है।

उड़द के पारंपरिक घरेलू उपयोग

1. लकवा में

उड़द को सोंठ के साथ उबालकर सेवन करने से लाभ बताया गया है।

2. गठिया में

अरंड की जड़ की छाल के साथ उड़द को उबालकर सेवन करने की परंपरा रही है।

3. फोड़े-फुंसियों में

उड़द की पुल्टिस प्रभावित स्थान पर लगाने से लाभ माना जाता है।

4. नकसीर में

उड़द के आटे का लेप तालू पर लगाने की पारंपरिक विधि प्रचलित रही है।

5. हिचकी में

हल्दी, सन की छाल और उड़द के आटे के धूम्र प्रयोग का उल्लेख आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है।

6. स्नायु शक्ति बढ़ाने में

उड़द के विशेष योगों का उपयोग स्नायु तंत्र को मजबूत बनाने हेतु किया जाता रहा है।

7. सूजन में

उबले हुए उड़द का लेप सूजन वाले स्थान पर लगाने से लाभ बताया गया है।

8. मुख विकारों में

उड़द के आटे से बने बड़े मक्खन के साथ सेवन करने की परंपरा वर्णित है।

सावधानियां

  • गैस या कफ की समस्या वाले व्यक्ति सीमित मात्रा में सेवन करें।
  • पाचन कमजोर होने पर हींग, अदरक या काली मिर्च के साथ सेवन करें।
  • किसी गंभीर रोग में चिकित्सक की सलाह के बिना घरेलू उपचार न अपनाएं।

निष्कर्ष

उड़द केवल एक पौष्टिक दाल ही नहीं बल्कि आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा में वर्णित एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ भी है। उचित मात्रा में सेवन करने पर यह शरीर को शक्ति, पोषण, स्नायु बल तथा ऊर्जा प्रदान करने में सहायक हो सकता है।

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