आम के 20 चमत्कारी आयुर्वेदिक प्रयोग | Mango Ayurvedic Benefits | आम आयुर्वेदिक गुण, पहचान

Sachinta maharaj

🥭 आम (Mango) – आयुर्वेदिक गुण, पहचान, औषधीय उपयोग एवं घरेलू नुस्खे

आम को भारतीय संस्कृति में फलश्रेष्ठ कहा गया है। आयुर्वेद, यूनानी और लोक चिकित्सा – तीनों पद्धतियों में आम को अत्यंत उपयोगी औषधीय फल माना गया है। आम केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शक्ति और सौंदर्य का भी प्रतीक है। इस लेख में हम आम के नाम, पहचान, गुण, औषधीय प्रयोग और विशेष योग को विस्तार से जानेंगे।


🌿 आम के विभिन्न नाम

  • हिन्दी: आम
  • संस्कृत: आम्र, फलश्रेष्ठ, कामसर, कामवल्लभ, वसन्तद्रु
  • बंगाली: आम
  • मराठी: आंवा
  • गुजराती: आंवो
  • कन्नड़: माविनफल
  • तेलुगु: माविकी
  • अरबी: अवज
  • अंग्रेज़ी: Mango

🌳 प्राप्ति स्थान एवं पहचान

आम भारतवर्ष में सर्वत्र पाया जाता है। यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है:

  • कलमी आम
  • बीजू आम – बीज से उत्पन्न आम

👉 औषधि प्रयोग में बीजू आम को श्रेष्ठ माना गया है।


⚖️ आयुर्वेद के अनुसार आम के गुण

🟢 कच्चा आम (केरी)

  • रस: खट्टा, कसैला
  • गुण: रुचिकारक, आँतों को संकोचित करने वाला
  • दोष प्रभाव: वात एवं पित्त को बढ़ाने वाला
  • उपयोगी: अतिसार, मूत्र विकार, गले के रोग, योनि रोग

👉 आमचूर – खट्टा, स्वादिष्ट, कसैला, मेदनाशक, कफ-वात हर


🟡 पका हुआ आम

  • रस: मधुर
  • गुण: स्निग्ध, भारी, शीतल
  • प्रभाव: वीर्यवर्धक, कान्तिवर्धक, वातनाशक
  • लाभ: प्रमेह, व्रण, रक्त व कफ विकार में उपयोगी

🌼 आम का मौर (फूल)

  • शीतल, रुचिवर्धक
  • अग्निदीपक, मलरोधक
  • कफ, पित्त और प्रमेह नाशक

🌱 आम की जड़

  • कसैली, शीतल, सुगंधित
  • कफ एवं वात नाशक

🍃 आम के पत्ते

  • कोमल पत्ते कसैले
  • वात, पित्त और कफ नाशक
  • रुचिकारक एवं मलरोधक

🟤 आम की गुठली (बीज)

  • स्वाद: मीठा, तिक्त, कसैला
  • लाभ: अतिसार, वमन, हृदय पीड़ा
  • बीज का तेल: मुख रोग, कफ और वात में लाभकारी

🧪 यूनानी चिकित्सा में आम

  • आम की छाल: रक्तस्राव रोकने वाली, संकोचक
  • पत्ते: बवासीर में उपयोगी
  • पत्तों का धूम्रपान: कुक्कुरखांसी में लाभ
  • फूल: कफनाशक, रक्तवर्धक
  • फल: यकृत व तिल्ली के लिए हितकारी, सौंदर्यवर्धक
  • बीज: जीर्ण अतिसार में उपयोगी, कामोद्दीपक

🩺 आम के 20 प्रमुख औषधीय प्रयोग

1️⃣ रक्तस्राव, श्वेत प्रदर, खूनी बवासीर

आम की छाल का रस + चूने का पानी 7 दिन लेने से लाभ।

2️⃣ सुजाक रोग

आम की छाल जौकुट कर जल में भिगोकर 7 दिन पीने से लाभ।

3️⃣ गले के रोग

सूखे पत्तों का धूम्रपान।

4️⃣ अतिसार

आम की गुठली + बेलगिरी + मिश्री चूर्ण।

5️⃣ कष्टसाध्य दस्त

गुठली की गिरी का लेप।

6️⃣ रक्तप्रदर व कृमिरोग

गुठली का चूर्ण 10–15 रत्ती।

7️⃣ हिचकी

आम के पत्तों का धूम्रपान।

8️⃣ लू लगना

भुनी केरी का रस + मिश्री।

9️⃣ जलन/जलना

गुठली की गिरी का लेप।

🔟 जवानों का अतिसार

गुठली + गोंद + इन्द्रजौ चूर्ण।

1️⃣1️⃣ खूनी बवासीर

कोमल कोंपलों का रस + शक्कर।

1️⃣2️⃣ दाद

फल के डंठल से निकला चोप।

1️⃣3️⃣ मकड़ी विष

आमचूर का लेप।

1️⃣4️⃣ कान दर्द

पत्तों का गुनगुना रस।

1️⃣5️⃣ बवासीर (खूनी/वादी)

आम व जामुन पत्तों का स्वरस + दूध।

1️⃣6️⃣ नेत्र पीड़ा

केरी को पीसकर आँख पर बांधें।

1️⃣7️⃣ नकसीर

गुठली की गिरी सूंघें।

1️⃣8️⃣ किसी भी रक्तस्राव में

आम की अन्तर्छाल का रस।


🍯 विशेष आयुर्वेदिक योग – आम्रपाक

सामग्री:

  • पके आम का रस – 4 सेर
  • मिश्री – 1 सेर
  • घी – 1 पाव
  • सोंठ चूर्ण – ½ पाव

मंद आंच पर पकाकर शीतल होने पर शहद मिलाएँ।

सेवन मात्रा: 1–4 तोला (भोजन से पहले)

लाभ:

  • बल व वीर्यवर्धक
  • रतिशक्ति बढ़ाता है
  • क्षय, दमा, संग्रहणी, अम्लपित्त, पीलिया में लाभकारी

👉 नियमित सेवन से व्यक्ति पुष्ट, निरोग और बलवान बनता है।


🎶 स्वर एवं कंठ शुद्धि हेतु योग

आम के सूखे मौर, मुलेठी, आंवला, छोटी इलायची, मिश्री आदि से बनी गोली खांसी दूर कर स्वर को मधुर बनाती है।


🔔 निष्कर्ष

आम केवल फलों का राजा ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद का अनमोल रत्न भी है। इसके फल, पत्ते, छाल, गुठली – सभी औषधीय गुणों से भरपूर हैं। सही विधि और मात्रा में प्रयोग करने पर आम अनेक रोगों में चमत्कारी लाभ देता है।

👉 स्वास्थ्य, शक्ति और सौंदर्य – तीनों के लिए आम को अपने जीवन में स्थान दें।


📌 Disclaimer

यह लेख आयुर्वेदिक ग्रंथों एवं लोक-चिकित्सा पर आधारित है। किसी गंभीर रोग में प्रयोग से पूर्व योग्य वैद्य या चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

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