आम्बगुल क्या है? (What is Ambagul) – Heart Problems, Weakness & Ayurvedic Uses

Sachinta maharaj

 आम्बगुल (Ambagul) : आयुर्वेदिक परिचय, गुण और औषधीय उपयोग

प्रस्तावना

आम्बगुल एक महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पति है, जिसका उपयोग प्राचीन काल से आयुर्वेद में किया जाता रहा है। यह पौधा अपने हृदयवर्धक एवं संकोचक गुणों के लिए जाना जाता है। भारत सहित कई एशियाई देशों में यह प्राकृतिक रूप से पाया जाता है और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसका विशेष स्थान है।


नाम एवं पर्यायवाची

  • हिन्दी – आम्बगुल
  • बंगाली – ठगुअरा
  • मराठी (महाराष्ट्रीयन) – नागरी, नरगी, आम्बगुल
  • वर्मी – मिंगु
  • कन्नड़ – हालिगेबलि, हैजला, हंसिबालि, केराहुलि
  • गढ़वाली – लोहारू
  • कुमाऊँनी – घिवेन, मिजहोला
  • तमिल – कुलंगि, कुलारि

प्राप्तिस्थान एवं पहचान

आम्बगुल एक प्रकार की बहुशाखी झाड़ी है, जो प्रायः ऊँचे वृक्षों पर चढ़ती हुई पाई जाती है। इसकी प्रमुख पहचान इस प्रकार है:

  • इसकी छाल फिसलनयुक्त होती है।
  • इसके पत्ते वी (V) के आकार के, चिकने एवं फिसलने वाले होते हैं।
  • पत्तों की ऊपरी सतह पर छोटा एवं सफेद रोआँ पाया जाता है।
  • इसके फूल बड़े-बड़े गुच्छों में लगते हैं, जो देखने में आकर्षक होते हैं।
  • इसका फल हल्के गुलाबी रंग का होता है, जिसमें आठ मजबूत धारियाँ होती हैं।

यह वनस्पति मुख्यतः भारतवर्ष और सीलोन (श्रीलंका) के पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है। इसके अतिरिक्त यह चीन एवं मलाया द्वीप समूह में भी प्राकृतिक रूप से उगती है।

आयुर्वेदिक गुण (Guna)

आयुर्वेद के अनुसार आम्बगुल के गुण इसे एक उपयोगी औषधीय पौधा बनाते हैं:

  • इसके फूल हृदय को बल देने वाले माने जाते हैं।
  • इसमें संकोचक (Astringent) गुण पाए जाते हैं, जो शरीर के ऊतकों को सुदृढ़ करने में सहायक होते हैं।
  • इसका फल कश्मीर क्षेत्र में संकोचक औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है।

औषधीय उपयोग

  • हृदय की कमजोरी में इसके फूलों का पारंपरिक उपयोग किया जाता है।
  • संकोचक गुणों के कारण यह कुछ विशेष आंतरिक विकारों में सहायक माना जाता है।
  • लोक चिकित्सा पद्धतियों में इसका प्रयोग शारीरिक संतुलन बनाए रखने हेतु किया जाता है।

नोट: आम्बगुल का उपयोग किसी योग्य आयुर्वेदाचार्य या चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।

निष्कर्ष

आम्बगुल एक दुर्लभ लेकिन अत्यंत उपयोगी औषधीय वनस्पति है। इसके फूल और फल आयुर्वेद में विशेष महत्व रखते हैं। यदि सही मार्गदर्शन में इसका उपयोग किया जाए, तो यह हृदय स्वास्थ्य एवं संकोचक औषधि के रूप में लाभकारी सिद्ध हो सकती है

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